Description
डॉ मलय कुमार झा (कुमार मलय) केंद्रीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य हैं। एक लेखक और कवि होने के साथ-साथ वे एक समीक्षक भी हैं। ग़ज़ल, कविता, कहानी, लघु-नाटिका जैसी विधाओं में उनकी अनेक रचनाएँ हैं। इनका एक साझा संस्करण “कुछ सीप कुछ मोती” और पाँच एकल संग्रह “लम्हों की परछाइयाँ”, “शब्दों का यायावर”, “अहसासों के साये”, “शब्दों की सरगोशियाँ”, और ” ख़्वाबों के शामियाने में” प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी छठी पुस्तक ” ख्यालों के जुगनू” इस समय आपके हाथों में है। इतना ही नहीं डॉ कुमार 35 से भी अधिक संकलनों में को सह-लेखक रह चुके हैं। ग़ज़ल इनकी पसंदीदा विधा है जिसमें ये उर्दू के आसान लफ़्ज़ों का प्रयोग करते हैं जिसे सब समझ सके और महसूस कर सके। इनकी कई ग़ज़लों को संगीत में स्वरबद्ध किया जा चुका है। भावनाओं की अभिव्यक्ति और यथार्थ से उनका संबंध ही उन्हें प्रेरित करता है अपनी लेखन यात्रा में अग्रसर रहने के लिये। इनकी रचनाओं में जहाँ एक ओर रिश्तों की गहराइयाँ हैं, वहीं दूसरी ओर आसानी से टूटने का दर्द भी है। इनकी रचनाओं को पढ़ कर पाठकों को लगता है जैसे कि उनकी ही भावनाएँ पन्नों पर उतर गई हैं।





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