Description
कविता प्रत्येक मानव के भीतर भाव रूप में मौजूद है। मनुष्य के अंदर तरह-तरह के भाव उतपन्न होते है, मैंने अपने अंदर उतपन्न भावो को लिखने का प्रयास किया है। कहते है जहाँ शब्दों की सीमाए समाप्त होती है वही से कविता आरम्भ होती है। कविताएँ पढ़ने बोलने में बहुत छोटी हो सकती है परंतु इनका प्रभाव बेहद असरदार होता है, खासतौर से तब जब वे सहज और गहरे अर्थ लिए होती है। लेखक जब अपने मन के भावों को पाठको तक उसी रूप में पहुँचा पाता तभी सही मायने में लेखक कहलाता है जहाँ उसके शब्दों के साथ-साथ पाठक भी साझीदार होते है। यह पुस्तक मेरी नौवी काव्य-कृति है जो आपके हाथ में है। इनको लिखने के लिए मेरे बच्चों ने प्रेरित किया व पूर्णरूप से योगदान दिया।





Reviews
There are no reviews yet.